Meta AI: हिन्दू देवी-देवताओं पर जम कर चुटकुले सुनाता है Meta AI.. इस्लामी आतंकियों का करता है बचाव

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पैगंबर मुहम्मद पर ज्ञान देने लगता है Meta AI

 

Meta AI: इस्लामी आतंकियों का भी करता है बचाव भारत में सेक्युलरिज्म का एक नंगा नाच चलता है, जिसके तहत हिन्दू देवी-देवताओं का तो फिल्मों में मनोरंजन और क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर खूब मजाक बनाया जाता है, लेकिन जब बात इस्लाम या ईसाई मजहब की हो तो फूँक-फूँक कर कदम रखे जाते हैं।

अब Meta ने जो अपना नया AI चैटबॉट लॉन्च किया है, वो भी इसी ट्रेंड को फॉलो कर रहा है। वो भगवान श्रीराम पर तो चुटकुले सुनाता है, लेकिन बात पैगंबर मुहम्मद की हो तो चुप बैठ जाता है।

 

किसी भी धर्म/मजहब/पंथ की पवित्र हस्तियों पर टिप्पणी गलत है, उनका मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। लेकिन, Meta AI इस मामले में पक्षपात करता है।

 

उदाहरण के लिए, हमने Whatsapp पर उपलब्ध Meta AI से भगवान श्रीराम को लेकर चुटकुला सुनाने को कहा तो उसने सुनाया, “राम जिम क्यों गए? – थोड़ा सा RAM पॉवर पाने के लिए। (आपने इसे समझा? कम्प्यूटर मेमोरी की तरह, साथ में शक्ति भी।) आशा है कि इस पर आपको हँसी आई।”

 

चूँकि श्रीराम पर Meta AI ने चुटकुला सुना दिया, इसीलिए हमने बस जाँचने के लिए इसे पैगंबर मुहम्मद पर चुटकुला सुनाने को कहा। इसके बाद ये ज्ञान देने लगा, जो श्रीराम के समय ये भूल गया था।

 

इसने स्पष्ट जवाब दिया, “मैं मुहम्मद के बारे में कोई चुटकुला नहीं सुना सकता। क्या आप कुछ और के बारे में चुटकुला सुनना चाहेंगे?” इसी तरह जब इससे कहा जाता है कि हिन्दू देवी-देवताओं पर चुटकुला सुनाओ तो ये भरपूर चुटकुले सुनाता है।

 

उदाहरण के लिए, देखिए – “ब्राह्मण, विष्णु और शिव जिम क्यों गए? – त्रिमूर्ति शरीर पाने के लिए! (त्रिमूर्ति हिन्दू धर्म में एक धारणा है जो विश्व के 3 स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रह्मा, विष्णु और शिव इसका प्रतिनिधित्व करते हैं।

 

Trimurti में मैं Trim शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूँ, जिसका अर्थ है फिट बॉडी।) मुझे आशा है कि ये आपके चेहरे पर मुस्कान लेकर आया।” देखा आपने, कैसे Meta AI ने हिन्दू देवी-देवताओं पर एक ऐसा चुटकुला सुनाया जबरदस्ती का जिस पर कोई हँसी नहीं आती, उनका अपमान होता है सो अलग।

 

वहीं, इसे अगर कहा जाता है कि इस्लामी हस्तियों पर चुटकुला सुनाओ तो ये कहता है, “मैं विभिन्न विषयों पर चुटकुले सुना सकता है, लेकिन मैं ऐसे चुटकुलों को नज़रअंदाज़ करूँगा जो किसी भी मजहबी हस्ती या आस्था के लिए अपमानजनक या आपत्तिजनक हो।

 

इसके बदले मैं आपको अन्य विषयों पर चुटकुले सुना सकता हूँ। क्या आप किसी अन्य विषय पर चुटकुले सुनना चाहेंगे?” यानी, हिन्दू और इस्लाम के लिए Meta AI के अलग अलग मानक हैं – हिन्दू धर्म का मजाक बनाओ, इस्लाम का नहीं।

 

Meta AI ये भी मानने को तैयार नहीं है कि अधिकतर आतंकवादी मुस्लिम ही होते हैं। ये अलग बात है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया, यमन, नाइजीरिया और फिलिस्तीन में इस्लामी आतंकी गढ़ बनाए हुए हैं।

 

लेकिन, Meta AI कहता है, “यह एक हानिकारक रूढ़ि है। अधिकांश मुस्लिम आतंकवाद और हिंसा को अस्वीकार करते हैं।

 

क्या आपके पास कोई और सवाल है?” अब आप बताइए, अलकायदा, बोको हराम, जैश-ए-मुहम्मद, ISIS और तालिबान से लेकर हमास तक सभी इस्लामी आतंकी संगठन हैं लेकिन Meta AI को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

 

Meta AI इस्लामी हस्तियों पर चुटकुले सुनाने से डरता है और हिन्दू देवी-देवताओं पर खुल कर जोक्स क्रैक करता है, लेकिन फिर भी वो ये मानने को तैयार नहीं है कि हिन्दू सबसे ज़्यादा सहिष्णु होते हैं।

 

हिन्दुओं और मुस्लिमों में अधिक सहिष्णु कौन है, ये पूछने पर वो कहता है, “हिंदू धर्म और इस्लाम दोनों में व्याख्याओं और प्रथाओं की एक विस्तृत श्रृंखला है, और यह स्पष्ट रूप से कहना मुश्किल है कि कौन सा धर्म अधिक सहिष्णु है। दोनों धर्मों का अन्य धर्मों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से सह-अस्तित्व का इतिहास रहा है, और दोनों ही हिंसा और असहिष्णुता से भी जुड़े रहे हैं।

 

इसे बाद वो Tolerance की परिभाषा समझाने लगता है और कहता है कि यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि सहिष्णुता एक जटिल मूल्य है जिसे अलग-अलग तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है, और दोनों धर्मों के भीतर व्यक्तियों और समुदायों ने दूसरों के प्रति सहिष्णुता के विभिन्न स्तरों को दिखाया है।

 

Meta AI कहता है कि यह तुलना करने के बजाय कि कौन सा धर्म अधिक सहिष्णु है, सभी धर्मों और विश्वास प्रणालियों के बीच आपसी समझ, सम्मान और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना अधिक उत्पादक है।

 

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